Friday, September 24, 2010

Zubaan de de.....................

रब .....
मुझको थोड़ी सी तू जुबां दे दे ,
जुबां को अनकहा बयाँ दे दे ,

कह दूँ उससे जो मैं चाहूँ बातें ,
तन्हा पहलू में सिसकती रातें ,
रोती रातों में अँधेरे की शरम ,
जिसमें दिखती मुझे उसकी आँखें ,

उसकी आँखों में कई ख्वाब से हैं ,
दिखते होठों में कुछ गुलाब से हैं ,
छिपती गालों में सुबह की लाली ,
झुकती पलकें पलाश की डाली ,
कैसे ये बात उसे में कह दूँ ,
और कैसे भला में , उससे बिन कहे रह लूँ ,

या तो रब सुन तू कुछ ऐसा कर दे ,
मेरे चेहरे को आइना कर दे ,
उसको दिख जाए मेरे दिल की दशा,
उसको हो जाए मेरे जैसा नशा ,
नशा ऐसा कि कुछ ना याद रहे ,
गर रहे याद तो बस मेरी वफ़ा याद रहे ,
मेरे हाथों कि छुवन , ज़ुल्फ़ पर आबाद रहे ,
हाँ रहे मेरी तरह वो भी हो बर्बाद रहे ....

रब ......
लोग कहते हैं कि तेरा कोई वजूद नहीं ,
ज़र्रे ज़र्रे में तो क्या , तू कहीं मौजूद नहीं ,
गर होता कहीं तो दर्द मेरा पी लेता ??
जैसे जीता हूँ मैं क्या उसके बिना जी लेता ??
दी मुझे मौत तो क्या उसको ज़िन्दगी देता ??
दी मुझे पीर तो क्या उसको दिल्लगी देता ??

इश्क करने को दिया दिल तो जुबां भी देता ,
और गर देता जुबां , उसको बयाँ भी देता ,

ना दे ज़मीन मुझे तू थोड़ा आसमान दे दे,
ए रब्ब ,
मुझको थोड़ी सी तू जुबां दे दे ,
जुबां को अनकहा बयाँ दे दे .............

Yaa rab.....
Mujhko thodi si tu zubaan de de,
zubaan ko ankahaa bayaan de de,

keh dun usse jo mein chaahun baatein,
tanhaa pehluu men sisaktii raatein,
roti raaton men andhere ki sharam,
jismen dikhti mujhe uski aankhein,

uski aankhon men kayii khwaab se hain,
dikhte hothon men kuchh gulaab se hain,
chhiptii gaalon men subah ki laali,
jhuktii palkein palaash ki daali,

kaise ye baat use mein keh dun,
aur kaise bhalaa mein, usse bin kahe reh lun,

yaa to rab sun tu kuchh aisaa kar de,
mere chehre ko aainaa kar de,
usko dikh jaaye mere dil ki dashaa,
usko ho jaaye mere jaisaa nashaa,
nashaa aisaa ki kuchh naa yaad rahe,
gar rahe yaad to bas meri wafaa yaad rahe,
mere haathon ki chhuvan, zulf par aabaad rahe,,
haan rahe merii tarah wo bhii ho barbaad rahe....

rabb......
log kehte ki teraa koi wajood nahin,
zarre zarre men to kya, tu kahin maujood nahin,
gar hota kahin to dard meraa pii leta??
jaise jeeta hun mein kya uske bina jee leta??
dii mujhe maut to kya usko zindagi deta??
dii mujhe peer to kya usko dillagi deta??

ishq karne ko diya dil to zubaan bhi deta,
aur gar detaa zubaan, usko bayaan bhi detaa,

E Rabb,
mujhko thodi si tu zubaan de de,
zubaan ko ankahaa bayaan de de.............

3 comments:

Vandana ! ! ! said...

मेरे चेहरे को आइना कर दे....ह्म्म्म बहुत खूब!!!!!!!!!!! अच्छी कविता है.... और बहुत दिनों के बाद भी.... लिखते रहो....one more request.... can u plz remove word verification before posting a comment..

abhishek said...

bahut sunder bhav hain ...

Ali said...

sahi me
"zubaaan de de"

wordless